दिशाओं का शुभाशुभ विचार

Rajkumar Jain

vastu-disha

541 View
दिशाओं का निर्धारण सूर्योदय की दिशा के आधार से किया जाता है। सूर्योदय की दिशा पूर्व कहलाती है। सूर्यास्त की दिशा पश्चिम दिशा कही जाती है। इनके अतिरिक्त सूर्योदय की दिशा से बायें ओर समकोण पर उत्तर दिशा तथा दायीं ओर समकोण पर दक्षिण दिशा होती है। इनके मध्य में चार विदिशाएं होती हैं। उत्तर एवं पूर्व के मध्य ईशान विदिशा होती है। पूर्व एवं दक्षिण के मध्य आग्नेय विदिशा होती है। दक्षिण एवं पश्चिम के मध्य नैऋत्य विदिशा होती है। पश्चिम एवं उत्तर के मध्य वायव्य विदिशा होती है।
 
इन अष्ट विशाओं का मानव जीवन पर प्रभाव इस प्रकार पड़ता है
 
1. पूर्व - पितृ दिशा है। मकान का पूर्वी खुला भाग पूरी तरह ढंक देने पर मकान स्वामी रहित हो जाता है अर्थात् परिवार को पुरुष प्रधान सदस्य का अवसान हो जाता है।
2. आग्नेय- स्वास्थ्य प्रदाता है।
3. दक्षिण - समृद्धि, सुख तथा संतोषदायक है। (यदि अन्य दिशाओं के साथ संतुलन कर इसे भारी बनाया जाता है)
4. नैऋत्य- व्यवहार, मनोभावना तथा अकालमृत्यु के लिए उत्तरदायी
5. पश्चिम- प्रगति, उत्कर्ष तथा प्रतिष्ठा प्रदाता है।
6. वायव्य - अन्य लोगों से सम्बन्धों का नियमन करता है जो हार्दिकता एवं आतिथ्य मे निमित है।
7. उत्तर - मातृ दिशा है। यह स्थान रिक्त न रखे जाने पर मकान निर्जन हो जाता है क्योंकेि परिवार की महिला सदस्यों की मृत्यु हो जाने से परिवार बगैर स्त्रियों का हो जाता है।
8. ईशान - पुरुष यश की निरंतरता को सुनिश्चित करता है। मकान में इस दिशा को काट देने से पुत्र नहीं होते।


Related Post You May like

एक भगवान की एक से ज्यादा मूर्तियां ना रखें

Rajkumar Jain

1191 View

मंदिर में हमेशा एक भगवान की मूर्ति रखे अगर कोई भी मूर्ति खण्डित हो जाएं, उसे चलते हुए पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए।

Read More..

ईशान आग्नेय वायव्य नैऋत्य कोण

Rajkumar Jain

1875 View

घर का उत्तर-पूर्व कोण वास्तु के अनुसार हर घर का ईशान कोण सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।

Read More..