भूमि की गंध

Rajkumar Jain

bhumi

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जो भूमि अनेक प्रकार से प्रशंसनीय औषधि वृक्ष और लताओं से सुशोभित हो, मधुर स्वाद वाली हो, उत्तम सुगंध वाली हो, चिकनी हो, गड्डो एवं छिद्रों से रहित हो, मार्ग श्रम को शांत कर मन को आनदित करने वाली हो, ऐसी भूमि पर ही वास्तु का निर्माण करना चाहिए।
 
जमीन में छोटा सा गड्डा करके मिट्टी निकालकर उसे सुघना चाहिए। 
 
यदि सूघने पर तली हुई चीजों के समान बास आती है तो वह जमीन उत्तम है। ऐसी जमीन पर वास्तु का निर्माण कर निवास करने वाले परिवार सुखी, समृद्धिशाली होते हैं तथा स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
 
यदि मिट्टी से अनाज सरीखी गंध आती हैं तो यह व्यापारी वर्ग को धनार्जन करने के लिए उपयुक्त रहती हैं।
 
यदि मिट्टी से मदिरा या सड़ी-गली चीजों की बास आती है तो यह उत्तम नहीं हैं। ऐसी जमीन पर निर्माण दरिद्रता को लाता हैं।
 
यदि जमीन में खून की गंध आती है तो इससे क्रूर भावना उत्पन्न होती हैं। ऐसी भूमि पर निर्माण कर निवास करने वाले लोग उग्र, जोशीले स्वभाव को धारण करते हैं।


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