भूमि का आकार

Rajkumar Jain

bhumi

1595 View
 वास्तु शास्त्र में उल्लेख है केि प्राकृतिक रूप से यदि भूमि की आठ दिशाओं का परिमाण सम और चौरस हो तो वह भूमि उत्तम है। भूमि का कोई भी कोना यदि कम-ज्यादा हो तो पारिवारिक परेशानियों में वृद्धि होती है। अत: जमीन के आकार का निर्णय तथा तदनुसार शुभाशुभ फल अवश्य ही विचार लेना चाहिए।
1 यदि भूमि चौरस तथा समकोण (90*) कोण के आकार वाली अर्थात् वर्गाकार या आयताकार हैं, तो वह भूमि उत्तम, सर्वसुख आनंद दायी होती है तथा धन वैभव आयु एवं आरोग्य में वृद्धि करने वाली हैं।
 
2. यदि भूमि त्रिकोण आकृति की है तो यह परिवार के लिए अशुभ है। इसमें स्वामी को मानसिक संताप, अदालत की परेशानियां तथा कायों में अपयश प्राप्त होता है।
 
3. ईशान दिशा का कोण 90" से कुछ अधिक होने पर सुख समृद्धि दायक व शुभ है।
 
4. वायव्य दिशा को कोण 90° से कुछ अधिक होने पर अशुभ तथा हिंसात्मक कार्यों का कराने वाला है।
 
5, नैऋत्य दिशा का कोण 90° से कुछ अधिक होने पर अशुभ हैं। स्वामी की राक्षसी, आसुरी प्रवृतियों में वृद्धि होती है।
 
6. आग्नेय दिशा का कोण 90° से कुछ अधिक रहने पर चिंताओं में वृद्धि होती हैं।
 
7. भूमि वर्तुलाकृति अर्थात् गोलाकर होने पर स्वामी का स्वभाव अस्थिर प्रवृति का होता है तथा सफलता नहीं मिलती।
 
8. पांच कोने वाली जमीन दुख उत्पन्न करती है।
 
9. यदि भूखण्ड प्रवेश करते समय कम चौड़ा तथा पीछे की ओर का भाग अधिक चौड़ा हो तो उसे गोमुखी भूखण्ड कहते हैं।
 

 


Related Post You May like

एक भगवान की एक से ज्यादा मूर्तियां ना रखें

Rajkumar Jain

1508 View

मंदिर में हमेशा एक भगवान की मूर्ति रखे अगर कोई भी मूर्ति खण्डित हो जाएं, उसे चलते हुए पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए।

Read More..

ईशान आग्नेय वायव्य नैऋत्य कोण

Rajkumar Jain

3707 View

घर का उत्तर-पूर्व कोण वास्तु के अनुसार हर घर का ईशान कोण सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।

Read More..