भूमि लक्षण

Rajkumar Jain

bhumi

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भूमि लक्षण

जो भूमि बोये हुए बीजों की तीन दिन में उगाने वाली, सम चौरस,  दीमक रहित बिना फटी हुई शल्य  रहित और जिसमें पानी का प्रवाह पूर्व ईशान या उत्तर तरफ जाता हो अर्थात  पूर्व ईशान या उत्तर तरफ नीची हो ऐसी भूमि सुख देने वाली है। 

 
दीमक वाली व्याधि कारक है, खारी भूमि निर्धन कारक है, बहुत फटी इई भूमि मृत्यु करने वाली और शल्य वाली भूमि दु:ख करने वाली है।
 
ग्रीष्म ऋतु में ठंढी, ठंडी ऋतु में गरम और चौमासे में गरम और ठंडी जो भूमि रहती हो वह प्रशंसनीय है।
 
जो भूमि अनेक प्रकार के प्रशंसनीय औषधि वृक्ष और लताओं से सुशोभित हो तथा मधुर स्वाद वाली, अच्छी सुगन्ध वाली, चिकनी, बिना खड्डे वाली हो ऐसी भूमि मार्ग में परिश्रम को शांत करने वाले मनुष्यों को आनन्द देती है ऐसी भूमि पर अच्छा मकान बनवाकर क्यों न रहे।
 
जिस भूमि के पर मन और आंख का सुन्तोष हो अर्थात् जिस भूमि को देखने से उत्साह बड़े उस भूमि पर घर करना ऐसा गर्ग आदि ऋषियों का मत है।
 


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