भूमि लक्षण

Rajkumar Jain

bhumi

2057 View

भूमि लक्षण

जो भूमि बोये हुए बीजों की तीन दिन में उगाने वाली, सम चौरस,  दीमक रहित बिना फटी हुई शल्य  रहित और जिसमें पानी का प्रवाह पूर्व ईशान या उत्तर तरफ जाता हो अर्थात  पूर्व ईशान या उत्तर तरफ नीची हो ऐसी भूमि सुख देने वाली है। 

 
दीमक वाली व्याधि कारक है, खारी भूमि निर्धन कारक है, बहुत फटी इई भूमि मृत्यु करने वाली और शल्य वाली भूमि दु:ख करने वाली है।
 
ग्रीष्म ऋतु में ठंढी, ठंडी ऋतु में गरम और चौमासे में गरम और ठंडी जो भूमि रहती हो वह प्रशंसनीय है।
 
जो भूमि अनेक प्रकार के प्रशंसनीय औषधि वृक्ष और लताओं से सुशोभित हो तथा मधुर स्वाद वाली, अच्छी सुगन्ध वाली, चिकनी, बिना खड्डे वाली हो ऐसी भूमि मार्ग में परिश्रम को शांत करने वाले मनुष्यों को आनन्द देती है ऐसी भूमि पर अच्छा मकान बनवाकर क्यों न रहे।
 
जिस भूमि के पर मन और आंख का सुन्तोष हो अर्थात् जिस भूमि को देखने से उत्साह बड़े उस भूमि पर घर करना ऐसा गर्ग आदि ऋषियों का मत है।
 


Related Post You May like

एक भगवान की एक से ज्यादा मूर्तियां ना रखें

Rajkumar Jain

1998 View

मंदिर में हमेशा एक भगवान की मूर्ति रखे अगर कोई भी मूर्ति खण्डित हो जाएं, उसे चलते हुए पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए।

Read More..

ईशान आग्नेय वायव्य नैऋत्य कोण

Rajkumar Jain

6385 View

घर का उत्तर-पूर्व कोण वास्तु के अनुसार हर घर का ईशान कोण सबसे पवित्र स्थान माना जाता है।

Read More..